
Kanger Valley National Park: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी रहस्यों से भरी गुफाओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। अब यहाँ एक और प्राकृतिक आश्चर्य ‘ग्रीन केव’ (ग्रीन गुफा) की खोज हुई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में इस गुफा को पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। अपनी हरी दीवारों और चमकदार चूने की आकृतियों के कारण यह गुफा शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनने जा रही है।
क्या है ग्रीन गुफा की खासियत
कांगेर घाटी की प्रसिद्ध कोटुमसर गुफा के पास कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित यह ‘ग्रीन गुफा’ अपनी तरह की पहली स्थलाकृति मानी जा रही है। इसका नाम इसकी दीवारों और छत से लटकती चूना पत्थर की आकृतियों (Stalactites) पर जमी हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतों (Microbial layers) के कारण रखा गया है।
गुफा के भीतर का अद्भुत नजारा
- हरी दीवारें: गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवों के जमाव से ढकी हरी दीवारें एक जादुई वातावरण का अहसास कराती हैं।
- विशाल कक्ष: गुफा के भीतर एक बड़ा कक्ष है जहाँ चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स पाए जाते हैं।
- फ्लो-स्टोन: यहाँ बहते पानी से बनी पत्थर की परतें (Flow-stones) देखने को मिलती हैं, जो गुफा की भव्यता को बढ़ाती हैं।
- दुर्लभ संरचना: चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की सबसे दुर्लभ गुफाओं में से एक है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
वन मंत्री केदार कश्यप के अनुसार, ग्रीन गुफा के खुलने से कांगेर घाटी में पर्यटन के एक नए युग की शुरुआत होगी।
- स्थानीय रोजगार: गाइड, होमस्टे और परिवहन के क्षेत्र में बस्तर के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।
- बुनियादी ढांचा: वन विभाग यहाँ पहुँच मार्ग, पैदल पथ और अन्य सुविधाओं का विकास कार्य युद्ध स्तर पर कर रहा है।
- सुरक्षा: गुफा की प्राकृतिक संरचना को नुकसान न पहुँचे, इसके लिए विभाग द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है।
जल्द होगा उद्घाटन
वन विभाग के आला अधिकारियों, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही. श्रीनिवासन और प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे के मार्गदर्शन में गुफा को पर्यटकों के लिए खोलने की योजना अंतिम चरण में है। घने जंगलों के बीच स्थित यह गुफा एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।





